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हरिदास
राठौर |
रामप्रसाद
मरालू
| विशेषर नेगी
|
कुम्भ दास
|
सोहन लाल
|
लुंगरू राम
|
पवन कौशल
|
जीवानंद
|
लच्छू राम
|
हिमाचल सरकार सतलुज बेसिन की सभी परियोजनाएं एस. जे.
वी.एन.एल. को सौपें
- हरिदास राठौर, ग्राम प्रधान, झाकड़ी
पंचायत
मैं इस
परियोजना से 1990 से लगातार जुड़ा हुआँ हूँ और मैंने
हमेशा जनता व परियोजना के हित में कार्य किया है । जनवरी
1998 में हम नौजवानों ने नाथपा झाकड़ी परियोजना
विस्थापित कल्याण समिति संस्था का गठन किया जिसमें मैनें
पांच साल तक महासचिव के पद पर बखूबी अपना दायित्व निभाया ।
मैं 1998 से अब तक लगातार जिला स्तरीय व राज्यस्तरीय
नाथपा झाकड़ी एवं बास्पा परियोजना विस्थापित, पुनर्वास
सलाहकार समिति में गैर सरकारी सदस्य के रूप में कार्य कर
रहा हूँ । परियोजना निर्माण कार्य के दौरान हम ने कई बार
परियोजना प्रबन्घन के खिलाफ शान्तिपूर्ण रोष रैलियों का
आयोजन किया लेकिन इससे हमारे मुद्वे हल नहीं हुए । जब हम
ने परियोजना के अघिकारियों से मिलऱ जुल कर बातचीत का
रास्ता अपनाया तो हमने परियोजना क्षेत्र जिला शिमला की सभी
पंचायतों में कई तरह के विकास कार्य करवाये । मैं जब भी
किसी समस्या का लेकर परियोजना के उच्च अधिकारियों के पास
गया मुझे कभी भी निराशा नहीं मिली । मैंने इन पन्द्रह
वर्षों में अनुभव किया है कि परियोजना प्रबन्धन बोर्ड ने
प्रभावित क्षेत्र में इतना पैसा विकास कार्यों में खर्च
किया है जितना कि राज्य सरकार तीस वर्षों में भी नहीं
खर्च कर सकती । इस परियोजना के बनने से यहां के लोगों के
जीवन स्तर में बहुत बदलाव आया है । आज हमारे प्रभावित
क्षेत्र के बच्चे डी.पी.एस. स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे
हैं । मेरा सुझाव यह है कि इस स्कूल में ज्यादा से ज्यादा
बच्चों को पढ़ने का मौका दिया जाये क्योंकि हर सैशन में
प्रभावित क्षेत्र के सभी लोगों के बच्चों को सीटें नहीं
मिलती । यहां पर अतिरिक्त भवन का निर्माण करना अति आवश्यक
है ताकि प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा का
भरपूर मौका मिले । ग्राम पंचायत क्षेत्र झाकड़ी में इन
पन्द्रह सालों में लगभग दो करोड़ 38 लाख रूपये कई तरह
के विकास कार्यों मके खर्च किये गये जिसके लिये मेरी
पंचायत हमेशा परियोजना की ऋणी रहेगी । वर्ष
2006-07-08-09 के लिये परियोजना प्रबन्धन बोर्ड ने
स्थानीय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, झाकड़ी में
अतिरिक्त भवन निर्माण करने के लिये लगभग 38 लाख रूपये व
झाकड़ी से धारगौरा सम्पर्क मोटर योग्य सड़क निमार्ण के
लिये 50 लाख रूपये का प्रावधान रखा हुआ है । इसके लिये
भी परियोजना प्रबन्धन बोर्ड का मैं अपनी पंचायत की ओर से
दिल की गहराईयों से धन्यवाद करता हूँ । जनवरी 2006 में
नाथपा झाकड़ी एवं बास्पा परियोजना विस्थापित पूनर्वास
सलाहकार समिति की बैठक सचिवालय शिमला में माननीय राजस्व
एवं पंचायती राज्य मंत्री श्री सत महाजन जी की अध्यक्षता
में सम्पन्न हुई थी । इसमे यह महत्वपूर्ण फैसला लिया
गया कि जो भूमि परियोजना निर्माण में अर्जित हूई है और जिन
लोगों के भूमि के मुआवजे सम्बन्धी मामले विभिन्न
न्यायालयों में विचाराधीन हैं उन का समझौता न्यायालय से
बाहर किया जाए । इस महत्वपूर्ण फसैले का परियोजना क्षैत्र
की बारह पंचायतों के विस्थापित लोगों ने भरपूर स्वागत किया
हैं । इस समस्या का समाधान होने से परियोजना क्षेत्र की
बारह सौ लोग लाभन्वित होगें । इस समझौते के तहत अभी तक मो
कार्यालय में आठ सौ से ज्यादा शपथ पत्र विस्थापित परिवारों
ने दिये हैं । अन्य लोग भी अपनी औपचारिकतायें पूरी करने
में लगे हुए हैं।
मैने
हिमाचल प्रदेश में अन्य परियोजनाओं का भी दौरा किया जिसमें
मैंने यह पाया कि जितनी धनराशि एस. जे. वी. एन. प्रबन्धन
बोर्ड विकास कार्यों में खर्च कर रही है । उतनी धनराशि
अन्य परियोजनाओं में देखने को नही मिल सकती । मेरी हिमाचल
सरकार से मांग है कि सतलुज बेसिन की जितनी भी प्रस्तावित
परियोजना हैं सभी का इकरार एस. जे. वी. एन. प्रबन्धन बोर्ड
के साथ किया जाए और प्रबन्धन बोर्ड में निदेशक पद पर
हमेशा हिमाचल से सम्बन्धित व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाए ।
हिमाचल से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति यहाँ की हर प्रकार की
स्थिती को समझने में ज्यादा सक्षम रहेगा।
अत में
मेरी महत्वपूर्ण मांग या सुझाव यह है कि परियोजना निर्माण
में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाए । इस कार्य में
ज्यादा से ज्यादा धन राशि का प्रावधान रखा जाए ताकि भविष्य
मकं इन परियोजना पर संकट के काले बादल न छा सकेध।
हरिदास
राठौर
ग्राम प्रधान, झाकड़ी पंचायत
विकास
के साथ रोजगारोन्मुख शिक्षा मुहैया करवा रहा है
एस.जे.वी.एन.एल. रामप्रसाद मरालू,पत्रकार,अमर उजाला,
रामपुर बुशहर
एशिया की
सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना नाथपा झाकड़ी को
बनाने में सफलता प्राप्त कर चुका सतलुज जल विद्युत निगम
लिमिटेड, हिमाचल प्रदेश समेत देश के कई अन्य राज्यों में
भी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण की योजना तैयार कर
चुका है । विद्युत परियोजनाओं का निर्माण करने के साथ साथ
एसजेवीएनएल ने परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को
रोजगारपरक शिक्षा मुहैया करवाने का बीड़ा भी उठाया हे ताकि
प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं का परियोजना में ही रोजगार
मुहैया हो सके । एसजेवीएनएल के इस प्रयास से उच्च शिक्षा
से वंचित युवा, तकनीकी शिक्षा में डिप्लोमा हासिल करके
अपने भविष्य को उज्जवल बना सके ।
सतलुज
बेसिन में जल विद्युत उत्पादन क्षमता को देखते हुए
एसजेवीएनएल ने 1500 मेगावाट की नाथपा झाकड़ी जल विद्युत
परियोजना का निर्माण् करने के बाद 412 मेगावाट की रामपुर
जल विद्युत परियोजना का कार्य आरम्भ कर दिया है । इस
परियोजना में प्रभावित क्षेत्रों में विकास व बेरोजगार
युवाओं के भविष्य का सुधारने के लिए निगम ने कई योजनाएं
तैयार की है । निर्माणधीन रामपुर जल विद्युत परियोजना के
अंतर्गत पहली बार आठ प्रभावित पंचायतों के युवाओं के निए
आईटीआई शिक्षा उपलब्ध करवाने की पहल की गई है । पिछले साल
निगम ने प्रभावित क्षेत्रों के पैंतीस युवाओं को आईटीआई के
विभिन्न ट्रेडों मकें योग्यतानुसार दाखिला करवाया है ।
तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं को एसजेवीएनएल की ओर
से 700 रूपये का मासिक वजीफा भी दिया जा रहा है । राहत
एवं पुनर्वास प्लान के अन्तर्गत आरम्भ की गई इस योजना मकं
इन स्कूलों के बच्चों को बैठने के लिए डेस्क, पुस्तकालय के
लिए पुस्तकें, प्रयोगशाला के लिए उपकरण खेल उपकरण समेत
अन्य सूविधाएँ मुहैया करवाई जांएगी ताकि बच्चों को किसी भी
सुविधा का मोहताज नहीं रहना पड़ेगा । परियोजना क्षेत्र के
जिन सरकारी स्कूलों मे अभी तक बच्चों को बैठने के लिए टाट
पट्टी तक भी उपलब्ध नहीं थी, साथ ही स्कूल जर्जर भवनों में
चल रहे थे, अब एसजेवीएनएल द्वारा राहत एवं पुनर्वास प्लान
के अंतर्गत आंरभ की गई योजना के तहत परियोजना क्षेत्र मकें
प्राथमिक स्कूलों को 75 हजार, माध्यमिक स्कूलों को एक
लाख, उच्च विद्यालयों को एक लाख 75 हजार, वरिष्ठ
माध्यमिक पाठशाला को दो लाख् रूपये द्वितीय अनुदान के रूप
में मिलेंगे । स्कूल परिसर में पौधारोपण करने के लिए
एसजेवीएनएल ने सभी स्कूलों को इस योजना के तहत अनूदान की
प्रथम किस्त भी जारी कर दी है । एसजेवीएनएल के इस प्रयास से न केवल क्षेत्र का विकास होगा
बल्कि युवाओं के कैरियर को भी संवारने में एक महत्वपूर्ण
कदम साबित होगा ।रामप्रसाद मरालू,पत्रकार
अमर उजाला, रामपुर बुशहर
विद्युत उत्पादन का एक प्रतिशत प्रतिवर्ष वन विस्तार में
व्यय किया जाए विशेषर नेगी, ब्यूरो चीफ, दिव्य हिमाचल,
रामपुर बुशहर
मौजूदा
बदलती परिस्थितियों को देखते हुए प्राकृतिक संसाधनों का
संरक्षण और उचित प्रबंधन जल विद्युत परियोजना के अस्तित्व
को बनाए रखने के लिए नितांत आवश्यक हो गया है । इसके लिए
विद्युत दोहन में लगी संस्थाओं को कारगर नीति बनाकर स्वयं
वन प्रबंधन कार्यों की देख-रेख करनी होगी और कुल विद्युत
उत्पादन का ऐक फीसदी प्रत्येक वर्ष जल, जंगल एवं जमीन को
बचाने के उपायों मके व्यय करने की व्यवस्था करनी होगी ।
इससे प्राकृतिक असंतुलन से उत्पन्न हो रही प्रत्यक्ष व
अप्रत्पक्ष समस्याओंका निदान हो सकेगा । हालांकि परियोजनाओं
के निर्माण के दौरान अथवा इससे पूर्व कई ऐसे प्रावधान रखे
गए हैं जिनमें जल ग्रहण क्षेत्र उपचचा योजना,प्रतिपूरक वन
रोपण अथवा वन संवर्धन गतिविधियां मुख्य हे किन्तु ये
सभीप्रयास उदेश्य प्राप्ति से हटकर सामाजिक मितव्यता पूर्ण
जरूरतों की ओर अग्रसर है । सतलुज घाटी क्षेत्र में तेजी से
जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण हुआ या होने जा रहा है ।
उनमें लहूरी-775 मे.गा.,रामपुर-412 मे.गा., नाथपा
झाकड़ी-1500 मे.गा.,गानवी-22.5 मे.गा., शोरंग-100 मे.गा.,
संजय जल विद्युत परियोजना-120 मे.गा., करछम वांगतू-1000
मे.गा., बास्पा-300 मे.गा., जंगी ठोपन-480 मे.गा., ठोपन
पवारी-480 मे.गा., खाब श्यासो-1020 मे.गा., श्यासो
स्पीलो-400 मे.गा., शोगठंग करछम- मे.गा., जबकि स्पीती नदी
में चांगो-यंगथंग, यंगथंग खाब आदि परियोजनाएं प्रस्तावित
हैं । कुछ वर्षों से प्रकृति के तीन महत्वपूर्ण संसाधन जल,
जंगल एवं जमीन पर औसतन से अधिक गतिविधियाँ हुई हैं जिससे
मौसम चक्र परिवर्तन,वायुमण्डलीय तापमान, सुखा, बाढ़ की
घटनाएँ बढ़ी है । इसके कारण क्षेत्र में भूस्खलन की भी
घटनाएँ बढ़ी है । इसका एक प्रमुख कारण क्षेत्र की प्रतिकूल
भौगोलिक परिस्थिति है । क्षेत्र की अधिकतर जल विद्युत
परियोजनाएं रन ऑफ द रिवर है जो भूस्खलन से उत्पन्न अधिक
गाद की समस्या से जूझ रही है । चूंकि घाटी वी आकार की है
अधिकतर पहाड़ियों दक्षिण मुखी व साठ डिग्री ढलान वाली
वनस्पति रहित है और मामूली सी भूस्खलन से भी बाढ़ की स्थिति
उत्पन्न हो जाती है ।
सतलुज नदी
तिब्बत के मासावर के निकट रूकस ताल से निकलती है और 320
मीटर के सफर के बाद शिपकिला यानी भारत क्षेत्र मके प्रवेश
करती है । दूसरी ओर पारचू व अन्य नदियों का भी उदगम स्थल
तिब्बत ही है जो शीत मरूस्थल क्षेत्र से होकर बहती है । कुल
मिलाकर सतलुज का 74 प्रतिशत जल ग्रहण क्षेत्र तिब्बत में
हैं । भारतीय स्थान नई दिल्ली द्वारा 1993-94 में प्रकाशित
आई.ए.एस. मानक के अनुसार यह जोन भूकम्प की दृष्टि से
संवेदनशील क्षेत्र में आता है । इतिहास गवाह है कि 1975
में इस क्षेत्र में 6.8 रिक्टर स्केल तीव्रता वाला
भूकम्प आ चुका है । बहरहाल ग्लोबल वार्मिग एवं ग्रीन हाऊस
गैसों के प्रभाव से 20 फीसदी ग्लेशियर पिधल चुके हैं ।
यही क्रम जारी रहा तो सन् 2050 तक जल विद्युत परियोजनाओं
का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा ।
उक्त सभी तथ्यों को ध्यान मकं रखते
हुए यथाशीध्र प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन
के प्रति सचेत होना होगा । इन कार्यो के लिए जल विद्युत
परियोजना निर्माता एक अलग से विंग स्थापित करं जो स्वतंत्र
रूप से जवाबदेही कार्यो का निष्पादन करें । केवल
मानीट्रिंग का जिम्मा ही वन विभाग व परियोजना निर्माता
संभाले । बजट के रूप मके प्रतिवर्ष सभी विद्युत परियोजना
ऐक प्रतिशत उत्पादन का पैसा संबधित विंग के खाते में जमा
करें । प्राकृतिक संसाधनों के प्रति स्थानीय समुदाय में
लगाव उत्पन्न करें ताकि वे इसके प्रति सचेत हों । विद्युत
निर्माता प्रति परिवार निश्चित यूनिट बिजली मुप्त उपलब्ध
करवाएं । इसके साथ-साथ समूचे क्षेत्र में प्रारम्भिक स्तर
पर स्थानीय समुदाय की जलपूर्ति व्यवस्था पूर्ण कर प्रबंधन
एवं विस्तार का जिम्मा भी उन्हें सौंपा जाए ।
विशेषर नेगी,
ब्यूरो चीफ, दिव्य हिमाचल, रामपुर बुशहर
मैं बाहवा पंचायत का प्रधान हूँ और मेरे
पंचायत के तहत 8 गाँव आते है।
जैसाकि
परियोजना के अधिकारियों ने हमें बताया है,बाहवा पंचायत की
वार्षिक बजट 28.77 लाख प्रति वर्ष है।
जैसाकि
हमें बताया गया है कि वर्ष 2007 - 08 को पहला वर्ष मानकर
विकास कार्य शुरू किए जा रहे हैं और इसके तहत पहला कार्य
ग्राम अवेरी के अंदर पक्का रास्ता बनाना है । इस पर
अनुमानित खर्च करीबन 6 लाख रूपये आएगा । बजट के तहत बाकि
कार्यों की सूची हम अपने ग्राम सभा से पारित करके जल्दी ही
परियोजना प्रबंधन को दे देंगे।
मुख्य
कार्य होंगे जैसाकि पंचायत भवन का निर्माण, गाँव के रास्ते
पक्के करने, गांव में स्थित स्कूलों को फेंसिंग,
प्लेग्राउंड मुहैया करवाना अथवा महिला मंडल की भवन आदि
बनवाना है।
परियोजना
प्रबंधन से समय समय पर आयोजित मिटिंग्स क माध्यम से हमें
जानकारी मिलती रहती है 30 मार्च 2007 को रिसेटलमेंट एक्शन
प्लान के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी हमें दी गई है।
हमारी
पंचायत से बच्चे टेकनिकल ट्रेनिंग फॉर लोकल युथ के तहत आई.
टी. आई. के लिए नामित किए गए है तथा स्कूलों को वृक्षारोपण
के लिए 20 हजार रूपये भी दिए गए है।
हम चाहते
है कि आबंटित बजट के तहत विकास कार्य प्रतिवर्ष समय से
पूरे किए जाएं । इसके अलावा हमारी यह भी मांग है कि हमारी
पंचायत से ज्यादा से ज्यादा बच्चे एस. जे. वी. एन. एल. में
नौकरी के लिए लगाए जाएं तथा न सिर्फ एस. जे. वी. एन. एल.
में बल्कि ठेकेदारों की कंपनियों में भी हमारे पंचायत से
ज्यादा से ज्यादा लोग नौकरी पर रखे जाएं क्योंकि परियोजना
के लिए हमारी पंचायत से भूमि अधिग्रहित की गई है।
श्री कुम्भ दास
ग्राम प्रधान
वहावा पंचायत
तहसील निरमण्ड
जिला कुल्लू
( हि.प्र.)
निगम के विकास कार्यों से आशवस्त हूँ -
सोहन लाल
मैं अपनी
पंचायत के सदस्य व अपनी पंचायत की जनता के तरफ से सबसे
पहले तो सतलुज वाणी में लेख छपाने हेतु आपका व आप के विभाग
का अपनी तरफ व सदस्य व जनता की तरफ से धन्यवाद करता हूँ कि
आप ने व आप विभाग में पंचायत के प्रधानों से विकास के
कार्य के बारे में जानने की रूची दिखाई । इसके लिए हम
पूर्ण पंचायत आपके आभारी है । मैं आपको सूचित करना चाहता
हूँ हमारी पंचायत में जो कार्य हुए वो इस प्रकार से है :
1.
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ज्योरी का निर्माण ।
2.
प्राइमरी पाठशाला ज्योरी में मैदान व जाली लगाई गई ।
3.
ज्योरी फार्म से कटौलू तक का रास्ता पक्का किया ।
4.
कोटला गाँव से मंगलाड तक का रास्ता पक्का किया गया ।
5.
कोटला मोड़ से कुन्नी गाँव तक का रास्ता पक्का किया ।
6.
गाँव त्यावल में एक खेल के मैदान का निर्माण ।
7.
कोटला गाँव में प्राइमरी पाठशाला के लिए एक शैड दिया गया
तथा इस शैड
की
मरम्मत भी की गई ।
मैं
सतलुज जल विद्युत द्वारा परियोजना क्षेत्रों में किये गये
विकास कार्यों से आशवस्त हूँ
इसके
अलावा मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि गाँव कोटला जो कि
परियोजना प्रभावित है, में कई विकास कार्य होने बाकी है ।
इनमें से निम्नलिखित मुख्य है :
1.
स्ट्रीट लाइट लगवाने का प्रावधान ।
2.
प्राइमरी पाठशाला के लिए पक्की इमारत का निर्माण ।
3.
परियोजना के अस्पताल में कोटला गाँव के निवासियों को मुफ्त
इलाज व
दवाईयाँ ।
4.
कोटला गाँव में विभाग के जर्जर हुए कैम्प की मरम्मत ।
5.
कोटला गाँव में खाली पड़ी जमीन का उपयोग ।
सोहन लाल - प्रधान
ग्राम पंचायत, त्यावल (ज्योरी)
रामपुर
मैं ग्राम
पंचायत
घारगौरा में सन् 1974 से रहा और सन् 2000 में
धारगोरा से झाकडी
पंचायत अलग हुई ।
हमारी
पंचायत को नाथपा
झाकड़ी पावर
स्टेशन से बहुत फायदे हुए जो कि बहुत
सराहनीय है ।
इस
परियोजना से किसी को कोई कमी नहीं आई ।
कुछ
कमियाँ रहीं भी तो वह हमारे अपने लोगों की
गलतियों की बजह से रही है ।
परियोजना ने
स्थानीय लोगों की
गाडियां
किराये पर ली ।
जिन लोगों को
नौकरियाँ चाहिए थी
परियोजना में
उन्हें
नौकरियाँ दी गई ।
परियोजना से
भूमिहीन हुए लोगों को
जमीनें दी गई,
बेघर हुए लोगों को मकान दिए गए ।
हाल ही में
एस.डी.एम.
रामपुर ने जिन बेघर और
भूमिहीन हुए लोगों की
शिनाख्त की और जो लोग इन
सुविधाओं से बंचित रह गए थे
उन्हें जमीन भी बांटी जा रही है ।
परियोजना
प्रभावित
क्षेत्रों के
स्कूलों में खेल के मैदान और भवन
निर्माण के साथ साथ बेहतर
सुविधाएं भी
परियोजना
प्रबंधन ने
उपलब्ध करवाई है ।
नाथपा झाकडी पॉवर
स्टेशन के बनने से सिर्फ झाकडी ही नहीं बल्कि इसके आस पास के कई
गाँवों में विकास हुआ है ।
जो कि
परियोजना
प्रभावित
क्षेत्रों में आते भी नहीं थे ।
लोगों के पास कच्चे मकान थे,
गाडियाँ भी किसी के पास नही थी परंतु आज सब लोगों के पास पक्के मकान है ।
अधिकतर के पास
गाड़ियाँ भी है ।
झाकड़ी और इसके आस पास के
क्षेत्र
धारगौरा, और
किन्नु-माशनु में
परियोजना
प्रबंधन ने स्कूल भवन बनाये है ।
यहाँ तक कि नाथपा गाँव के लिए
परियोजना
प्रबंधन सड़क बना रहे है ।
जबकि ये गॉव बाँध स्थल से काफी दूर है ।
लुंगरू राम
पूर्व ग्राम
प्रधान
झाकडी
पंचायत
मैं नाथपा झाकडी पॉवर
स्टेशन में परिचर के पद पर
कार्यरत हूँ ।
नाथपा झाकडी जल
विद्युत
परियोजना के
निर्माण के दौरान मेरा धर और सात बीघा जमीन
परियोजना में चली गई ।
इसके बदले मुझे पाँच बीघा जमीन और एक मकान दिया गया ।
और साथ ही 30 मई 1996 को मुझे इस
परियोंजना में नौकरी दी गई ।
पवन कौशल
परिचर
नाथपा झाकडी पॉवर
स्टेशन
मैं
जीवानंद झाकडी
पंचायत का
निवासी हूँ और मेरा बेटा
इंजीनियरिंग की पढाई कर रहा है हमने
परियोजना में एक
स्कोलर्शिप फार्म भरा जिसके
अंतर्गत पहली किस्त के रूप में मुझे 9,600रू. पर
क्वाटर (प्रत्येक
तिमाही) मिले ।
क्योंकि ये
डिग्री चार साल की है इसलिए मेरे बेटे को ये
सकालर्शिप चार सालों तक मिलती रहेगी ।
जीवानंद
निवासी, ग्राम
पंचायत झाकडी
सन् 1977 से मेरी दुकान झाकड़ी पंचायत
में थी जोकि परियोजना निर्माण में चली गई । इसके बाद सन्
1990 में मुझे झाकङी शॉपिंग काम्पलेक्स में दुकान परियोजना
प्रबंधन द्वारा दी गई और साथ ही 20 हजार रूपए मिले ।
लच्छू राम
झाकडी शोपिंग काम्पलेक्स पंचायत
सराहना
नाथपा
झाकड़ी परियोजना में चल रहे राहत पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन
के कार्यो मकं हासिल सफलता, भारत मकें अपने किस्म की
असाधरण सफलता है । इस सफलता का भारत में विश्व बैंक की
सहायता से नदी किनारों पर बनाई जाने वाली दूसरी परियोजनाओं
से संबधित पुनर्व्यवस्थापन संबंधी कार्यों को निष्पादित
करने में एक बेहतर उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है ।
विश्व
बैंक द्वारा नाथपा झाकड़ी जी विद्युत परियोजना की पुनर्वास
एवं पुनर्स्थापन योजना की प्रशंसा -अभियुक्ति
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