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सतलुज जल विद्युत निगम को मिनी रत्न स्टेट्स से नवाजा गया
13 May 2008

भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम सतलुज जल विद्युत निगम को " मिनी रत्न : वर्ग-ख्र् " का प्रतिष्ठित दर्जा प्रदान किया है।  निगम को यह दर्जा प्रदान किया जाना एक विशिष्ट उपलब्धि मानी जाएगी, जो इसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के मात्र चार वर्ष के अंदर हासिल हो गई है।

 

सतलुज जल विद्युत निगम को यह सर्वाधिक प्रतिष्ठित दर्जा सार्वजनिक उपक्रम विभाग द्वारा इस संबंध में तय किए गए सभी मानदण्डों पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए मिला है, जिससे निगम को बढ़े हुए अधिकार और कामकाजी स्वायतत्ता हासिल होगी।  मिनी रत्न दर्जे के अंतर्गत मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को और अधिक कार्यकुशल और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए उन्हें कुछ निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं पात्रता संबंधी शर्तों के अध्यधीन बढ़ी हुई स्वायतत्ता और वित्तीय अधिकार प्रदान किए जाते हैं।  मिनी रत्न दर्जे के अंतर्गत इन कंपनियों के वर्ग-ख्र्  एवं वर्ग-ख्ख्र् नामक दो वर्ग हैं।  सतलुज जल विद्युत निगम को इसकी शानदार उपलब्धियों के मद्देनजर वर्ग-ख्र् का दर्जा दिया गया है।

 

कंपनी के 1500 मेगावाट क्षमता के नाथपा झाकड़ी पावर स्टेशन ने मई,2004 में पूरे पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के बाद लगातार अधिक बिजली उत्पादन किया है।  इस पावर स्टेशन से 2006-07 के दौरान 6014 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन की तुलना में वर्ष 2007-08 के दौरान 6432 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पाद किया है।  वहीं वर्ष 2005-06 तथा 2004-05 के दौरान यही उत्पादन क्रमशः 4104 मिलियन यूनिट तथा 5147 मिलियन यूनिट था।  

 

कारपोरेशन द्वारा उत्पादित बिजली की मात्रा में लगातार बढ़ोत्तरी होने से इसे होने वाले लाभ में भी तदनुसार वृद्धि हुई है।  कंपनी को वर्ष 2006-07 के दौरान 732 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ, वहीं वर्ष 2007-08 के दौरान कंपनी को 715.75 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ (अस्थायी) होने की उम्मीद है।

 

इन्हीं उपलब्धियों के चलते निगम ने वर्ष 2007-08 के दौरान इक्विटी हिस्सेदारों को पहले ही 136 करोड़ रुपए का अंतरिम लाभांश दिया है, जिसमें भारत सरकार को 102 करोड़ रुपए और हिमाचल प्रदेश सरकार को 34 करोड़ रुपए का लाभांश दिया गया है।  जबकि वर्ष 2006-07 के दौरान निगम ने 235 करोड़ रुपए का लाभांश दिया था।

 

सतलुज जल विद्युत निगम की 11वीं एवं 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अपनी बिजली उत्पादन क्षमता में 3000 मेगावाट की वृद्धि करने की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके अंतर्गत 412 मेगावाट क्षमता की निर्माणाधीन रामपुर जल विद्युत परियोजना तथा हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखण्ड में  विभिन्न अन्वेषनाधीन स्थितियों वाली 5 परियोजनाएं और नेपाल में 402 मेगावाट की आबंटित एक परियोजना शामिल है।




 

   

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