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जलविद्युत संबंधी अक्सर पूछे जाने वाले
प्रश्न
जल विद्युत संयंत्रों
द्वारा कुल विश्व विद्युत आपूर्ति में से कितनी
आपूर्ति की जाती है ?
प्रत्येक वर्ष ± 2700 टी.डब्ल्यू.एच. का उत्पादन
होता है । जलविद्युत 66 देशों मे विद्युत उत्पादन
के 50% की तथा 24 देशों में कम से कम 90% की
आपूर्ति करती है ।
एक जलविद्युत संयंत्र के
प्रमुख घटक कौन से हैं ?
जलविद्युत संयंत्र के मुख्य धटक निम्नलिखित हैं
:-
बाँध/बैरेज
हैड वर्क्स यानि विद्युत इन्टेक, हैड रेग्यूलेटर एवं डिसिल्टिंग चैम्बर
इत्यादि
1. मुख्य सुंग/चैनल
2. सर्ज शॉफ्ट/सर्ज चैंबर
3. प्रेशर शॉफ्ट/पेनस्टॉक
4. भूमिगत एवं सतह पर विद्युत गृह
5 टेलरेस चैनल या टेलरेस सुंरग
संस्थापित क्षमता के आधार
पर जलविद्युत परियोजनाओं का वर्गीकरण किस प्रकार
का है?
माइक्रो : 100 केवी तक
मिनी : 101 के डब्ल्यू से 2 एम डब्ल्यू
लघु : 2 एम डब्ल्यू से 25 एम डब्ल्यू
मेगा : >= 500 एमडब्ल्यू की संस्थापित क्षमता की
जलविद्युत परियोजना ।
>= 1500 एमडब्ल्यू की संस्थापित क्षमता
की थर्मल परियोजना ।
जलविद्युत संयंत्रों
में प्रमुख टरबाईनों की कौन-कौन सी किस्में हैं ?
जलविद्युत संयंत्रों में मुख्य पाँच तरह की
टरबाईनें इस्तेमाल होती हैं :
1.
पेल्टन टरबाईन -
इस इपंल्स टरबाईन को सामान्यत : 250 मीटर
से अधिक पानी के हैड के लिए इस्तेमाल किया जाता
है ।
2.
फ्रांसिस -
इस रिएक्शन टरबाईन को 2.5 मीटर से 450
मीटर के हैड के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।
3.
काप्लान:
- एटजस्टनीय ब्लेडयुक्त प्रोपेलर
प्रकार की इस टरबाईन में 1.5 से 70 मीटर के हैड के
लिए इस्तेमाल किया जाता है ।
4.
प्रोपेलर -
यह 1.5 से 70 मीटर तक के हेड के लिए
इस्तेमाल की जाती है ।
5.
टेबुलर -
यह कम तथा मझोली ऊँचाई वाली परियोजनाओं
में सामान्यत: 15 मीटर से कम हैड के लिए इस्तेमाल
की जाती है ।
जलविद्युत संयंत्रों में
विद्युत उत्पादन किस प्रकार होता है ?
एक जलविद्युत संयंत्र में जलाशय बनाने के लिए
नदी पर एक ऊँचा बांध बनाया जाता है, जहां ऊर्जा को
बिजली में बदलने की प्रक्रिया संपन्न होती है ।
जलविद्युत संयंत्रों में बिजली उत्पादन के प्रथम
चरण में हाड्रोलॉजिकल चक्र के दौरान झीलों, नदियों
और नालों के मौसमीय वर्षा के रन ऑफ पानी को एकत्र
किया जाता है जो बांध के अनुप्रवाह की ओर बहता है
। बांध में से होकर पानी जलविद्युत संयंत्रों में
गिरता है, जिससे टरबाईन नामक एक बड़ा व्हील घूमता
है । यह टरबाईन गिरते पानी की ऊर्जा को मकैनिकल
ऊर्जा में बदलकर जनरेटर को चला देती है, आगे
जिससे बिजली पैदा होती है । इस प्रक्रिया के
उपरांत बिजली ट्रंसमिशन लाइनों के मार्फत जन उपयोग
के लिए उपलब्ध कराई जाती है और पानी वापस झीलों या
नालों में डाल दिया जाता है । जब पानी जलविद्युत
संयंत्रों से होकर गुजरता है तो उस प्रक्रिया के
दौरान पानी में कोई प्रदूषक नहीं मिलाया जाता,
जिससे यह प्रक्रिया पूर्णत: हानिरहित है ।
विश्व में सबसे बङा जलविद्युत संयंत्र कौन सा
है ?
चीन में यांग्तेज नदी पर अवस्थित लगभग 18,200
मेगावाट की संस्थापित क्षमता वाला थ्री गार्जिज
प्रोजेक्ट विश्व में सबसे बड़ा पावर स्टेशन है ।
भारत में सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना कौन सी
है ?
1500 मेगावाट की संस्थापित क्षमता का नाथपा
झाकड़ी जलविद्युत पावर स्टेशन
जलविद्युत संयंत्रों में उत्पादित बिजली की
लागत की बिजली के अन्य स्त्रोतों के परिप्रेक्ष्य
में तुलनात्मक स्थिति क्या है ?
जलविद्युत प्रकार के बिजली उत्पादन में बड़ा
भारी पूंजी निवेश लगता है, परन्तु इसमें किसी
खपतशील सामग्री का उपयोग नहीं होता और यह ऊर्जा का
नवीनीकरणीय स्त्रोत है, जिससे इसमें आवर्ती खर्च
बहुत कम होता है और दीर्घावधि में कोई बड़ा खर्च
नहीं होता । कोयला और गैस आधारित बिजली उत्पादन की
तुलना में यह हम खर्चीला है । बिजली आपूर्ति की
व्यवस्था में अक्सर होने वाली गड़बड़ियों को भी यह
कम करता है और यह अधिक विश्वसनीय एवं मुद्रास्फिति
से मुक्त है ।
जल विद्युत को ऊर्जा का नवीकरणीय स्त्रोत क्यों
कहा जाता है ?
जलविद्युत उत्पादन की प्रक्रिया में पानी की
खपत नहीं बल्कि इसका उपयोग मात्र होता है जो आगे
अन्य महत्वपूर्ण उपयोगों के लिए उपलब्ध रहता है ।
भारत का सर्वप्रथम जलविद्युत संयंत्र कौन सा है
?
देश में सबसे पहला जलविद्युत संयंत्र पश्चिमी
बंगाल के दार्जिलिंग जिले में है, जिसकी संस्थापित
क्षमता 130 केडब्ल्यू है और यह वर्ष 1897 में चालू
हुआ था ।
भारत की अनुमानित सकल जलविद्युत शक्ति
संभाव्यता कितनी है ?
60% के लोड फैक्टर पर देश की जलविद्युत
उत्पादन संभाव्यता लगभग 1,48,701 मेगावाट है, जो
लगभग 84000 मेगावाट की माँग पूरी कर सकती है ।
अभी तक भारत की सकल जलविद्युत शक्ति संभाव्यता
में से कितने का दोहन किया गया है ?
भारत की जलविद्युत उत्पादन संभाव्यता के
लगभग 19.9% का दोहन हो चुका है ।
बांधों के विभिन्न प्रकार कौन से हैं ?
परंपरागत कंक्रीट बांध, रोलर कांपैक्टिड
कंक्रीट बांध, रॉक फिल बाँध, कंक्रीट फोर्स्ड रॉक
फिल बांध (सीपीआरडी) , अर्थ फिल बांध, आर्क बांध
,बैरिजप्ट इत्यादि बांधों के विभिन्न प्रकार हैं ।
जलविद्युत उत्पादक मशीनों के यूनिट आकार थर्मल
विद्युत संयंत्रों की भांति क्यो मानकीकृत नहीं
है?
जलविद्युत उत्पादक मशीनों का आकार नदी में
पानी की उपलब्धता तथा परियोजना स्थल विशेष में जल
शीर्ष की उपलब्धता पर आधारित होने के कारण स्थान
और नदी की प्रकृति के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है
। ये आकार पानी के प्रबंधन और परिवर्तन पर भी
आधारित होते हैं ।
जलविद्युत परियोजनाओं की विभिन्न किस्में कौन
सी हैं ?
जलविद्युत योजनाओं के विभिन्न प्रकार निम्नवत्
हैं :-
1. सिर्फ रन-ऑफ-रिवर
विद्युत स्टेशन
2. भण्डारण आधारित विद्युतत स्टेशन
3. जलाशय रन आफ-रिवर स्टेशन
ग्रिडों में पीक लोड पूरा करने हेतु जलविद्युत
स्टेशनों को क्यों तरजीह दी जाती है ?
जल्दी शुरू और बंद किए जा सकने की अद्वितीय
क्षमता के कारण जलविद्युत स्टेशनों को ग्रिड में
पीक लोड की जरूरतें पूरी कर सकने का किफायती
विकल्प माना जाता है ।
परियोजना लागत क्या है और इसका वित्तपोषण कैसे
होता है ?
परियोजना चालू करने में हुआ पूंजीगत व्यय
परियोजना लागत होता है और इसका वित्त-पोषण मुख्यत:
इक्विटी और ऋण से किया जाता है ।
ऋण और इक्विटी के मुख्य स्त्रोत कौन-कौन से हैं
?
ऋण सामान्यत: घरेलू वित्तीय संस्थाओं तथा
विश्व बैंक, विदेशी व्यावसायिक बैंकों के समूह
इत्यादि जैसे बहुउद्देशीय वित्त-पोषण संस्थानों से
उपलबध होता है । इक्विटी की व्यवस्था सामान्यत:
सरकार की बजटीय मदद , आईपीओ तथा मौजूदा बिजली
उत्पादक कंपनियों की आंतरिक आय से की जाती है।
किसी जलविद्युत परियोजना के वित्तपोषण हेतु ऋण
एवं इक्विटी का मानक अनुपात क्या है ?
ऋण एवं इक्विटी का मानक
अनुपात 70:30 है ।
जलविद्युत परियोजना के क्या-क्या लाभ हैं ?
जलविद्युत ऊर्जा का एक नवीकरणीय अप्रदूषक और
पर्यावरण मित्र स्त्रोत है । इससे देश के फॉसिल
ईंधन जैसे दुर्लभ तथा गैर-नवीनीकरणीय ऊर्जा
स्त्रोतों की बचत होती है । बिजली के अन्य
स्त्रोतों की अपेक्षा जलविद्युत के कई अन्य उपयोग
हैं , जो निम्नवत् हैं:-
(क)
तकनीकी लाभ
ऐसा माना जाता है कि जलविद्युत परियोजनाओं का
जीवनकाल लंबा होता है और ईंधन पर कोई खर्च नहीं
होता तथा इसलिए ऊर्जा के अन्य स्त्रोतों की
अपेक्षा इसमें उत्पादन, प्रचालन एवं अनुरक्षण पर
खर्च कम होता है ।
(ख)
पर्यावरणीय लाभ
· ऊर्जा के प्रदूषणमुक्त एवं नवीकरणीय
स्त्रा÷त यानि पानी का उपयोग होता है ।
· सिंचाई एवं बहुउद्देशीय योजनाओं के
मार्फत कृषि उत्पादकता में बढ़ोत्तरी और जहां कहीं
भी संभव हो, इनका एक उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन
होता है ।
· इनके समतुल्य थर्मल तथा अन्य ईंधन आधारित
परियोजनाओं में उत्सर्जित ग्रीन हाऊस गैसों
(जी.एच.जी.) से बचाव होता है ।
· इनमें प्रतिपूरक वन्यारोपण, कैचमेन्ट
क्षेत्र उपचार, हरित-पट्टी विकास, स्वैच्छिक
वन्यारोपण इत्यादि जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत
बड़े स्तर पर निष्पादणीय वन्यारोपण क्रियाकलापों
से अन्तत: परियोजना क्षेत्र की पर्यावरणीय
गुणवत्ता सुधरती है ।
· विशाल जल भण्डारण बांधों के जरिए बाढ़ से
राहत
· पेयजल आपूर्ति के स्त्रोत
``
(ग) सामाजिक लाभ
जलविद्युत परियोजनाएँ समाज तथा परियोजना के आसपास
के निवासियों के लिए वरदान हैं । इनसे रोजगार के
अवसरों तथा आय में बढ़ोत्तरी होती है, जीवन-शैली
एवं जीवन यापन उन्नत होता है और इन स्थानों के
निवासियों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में उच्च
विकास दृष्टिगोचर होता है । जलाशय क्षेत्र एक
उत्तम मनोरंजन स्थल होता है ओर यह क्षेत्र के
इको-पर्यटन के विकास का स्त्रा÷त होता है ।
जलाशयों का उपयोग मछली-पालन के लिए भी होता है ।
बेहतर सिंचाई के लिए और अधिक पानी की उपलब्धता तथा
परियोजना क्षेत्र के ईद-गिर्द क्षेत्र के लोगों के
लिए पेयजल की उपलब्धता जैसे अन्य सीधे लाभ भी
जलविद्युत परियोजना एवं बांधों से प्राप्त होते
हैं ।
एसजेवीएन
द्वारा निष्पादित जलविद्युत स्टेशन की क्षमता
कितनी है ?
एसजेवीएन 1500 मेगावाट की संस्थापित क्षमता
एवं 6950 मेगावाट प्रतिवर्ष डिजाइन विद्युत वाली
एसजेवीएनन द्वारा निष्पादित प्रथम परियोजना नाथपा
झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन का प्रचालन कर रही है ।
वर्तमान में नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन
(एनजेएचपीसी) से उत्पादन बिजली की टैरिफ दर कितनी
है ?
सीईआरसी ने रू.2.35 प्रति यूनिट का अनंतिम
टैरिफ तय किया है ।
नाथपा
झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन (एनजेएचपीएस) की पूर्णता
लागत कितनी है ? नाथपा
झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन (एनजेएचपीएस) पूरी होने
की अभिस्वीकृति लागत रू.8187.713 करोड़ है ।
रामपुर
जलविद्युत परियोजना की लागत कितनी है ?
मार्च,2006 के मूल्य स्तर पर रू.2047.03 करोड़
।
रामपुर
जलविद्युत परियोजना में उत्पादित बिजली के लिए
आकलित लेबलीकृत टैरिफ कितना है ?
रू.1.8. प्रति यूनिट के आकलित समानीकृत टैरिफ
के साथ RHEP में वर्ष के दोरान 1770 मेगावाट बिजली
का उत्पादन होने की उम्मीद है ।
रामपुर
जलविद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन कब
संभावित है ?
सन 2012 तक ।
रामपुर
जलविद्युत परियोजना के ऋण हिस्से की पूर्ति किन
स्त्रोतों से की जा रही है ?
रामपुर जलविद्युत परियोजना के लिए ऋण की
व्यवस्था पूर्णत: विश्व बैंक के जरिए की जा रही
है।
क्या रामपुर जलविद्युत
परियोजना के लिए सभी सांविधिक मंजूरियां ले ली गई
हैं ?
वन एवं पर्यावरणीय मंजूरियों सहित सभी
सांविधिक मंजूरियां ले ली गई हैं ।
रामुपर जलविद्युत
परियोजना से क्या लाभ हैं और लाभग्राही कौन हैं ?
परियोजना में उत्पादित सकला बिजली में से 12
प्रतिशत बिजली रॉयल्टी के रूप में (जिसका अनुमानित
मूल्य प्रतिवर्ष 12 मिलियन अमरीकी डालर होगा)
हिमाचल प्रदेश सरकार को प्रदान करने की बजह से इस
परियोजना से हिमाचल प्रदेश राज्य के लोगों को
समूचे तौर पर लाभ पहुँचेगा । इसके अतिरिक्त,
हिमाचल प्रदेश राज्य को इस परियोजना में अपने
निवेश की एवज में 109 मेगावाट अतिरिक्त बिजली
आबंटित होगी और परियोजन से लाभांश भी मिलेगा ।
राज्य को परियोजना से उत्पादित बाकी बिजली में से
भी हिस्सा मिलेगा ।
उत्तरी क्षेत्र विद्युत ग्रिड के जरिए इस परियोजना
से भारतीय विद्युत प्रणाली में हर वर्ष 1,770
मिलियन यूनिट तक की आपूर्ति होगी, जिससे मौजूदा
उपभोक्ताओं को विशेषत: पीक समय के दौरान की जा रही
विद्युत आपूर्ति में सुधार होगा और उन किसानों तथा
अन्य उपभोक्ताओं को फायदा पहुँचेगा, जिन्हें
वर्तमान में या तो बिजली उपलब्ध नहीं है या बिजली
की बाधित आपूर्ति मिलती है ।
इस परियोजना के बड़े पर्यावरणीय लाभ भी हैं । यदि
रामपुर जलविद्युत परियोजना जितनी क्षमता के
कोयला या ईंधन आधारित विद्युत संयंत्र का निर्माण
किया जाता है तो इससे वातावरण में लगभग 12,000 टन
सल्फर डाईआक्साइड (एसओएक्स) , 6000 टन नाइट्रोजन
आक्साइड तथा लगभग 2 मिलियन टन कार्बन डाई आक्साइड
ग्रीन गैसों का हर वर्ष उत्सर्जन होगा । रामपुर
जलविद्युत परियोजना के निर्माण एवं प्रचालन से
भारत के नागरिकों को इस प्रदूषण से निजात मिलेगी ।
क्या
रामपुर जलविद्युत परियोजना के बनने से पड़ने वाले
पर्यावरणीय प्रभावों का आकलान किया गया है?
पर्यावरण प्रबंधन पर कितनी संभावित राशि व्यय की
जा रही है ?
पर्यावरण प्रभावों का आकलन किया गया है और
राज्य स्तरीय एजेंसियों की मदद से कार्य करके इन
दुप्रभावों को दूर किया जाएगा । परियोजना के
हिस्से के रूप में एसजेवीएन बाढ़ के प्रभावों से
उत्पन्न मृदा क्षरण को कम करने और वन आवरण में
सुधार लाने तथा कैचमैंट क्षेत्रों के उपचार हेतु
धन उपलब्ध कराएगा । पर्यावरण संबंधी कार्यों पर
रू.388.26 मिलियन की राशि खर्च की जाएगी ।
क्या रामपुर जलविद्युत
परियोजना में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए
कोई प्रावधान है ? इस पर कितनी राशि खर्च होगी ?
परियोजना हेतु पनुर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना
परियोजना प्रभवित व्यक्तियों से सतर्क एवं सतत
सलाह करके तैयार की गई है और अब यह निष्पादनाधीन
है । इस विषय में सूचना बायल गावं स्थित जनसूचना
केन्द्र, रामपुर स्थित सार्वजनिक पुस्तकालय, शिमला
तथा विश्व बैंक के सूचना केन्द्र से प्राप्त की जा
सकती है ।
परियोजना प्रभावित परिवारों (पीएएफ) के लिए
पुनर्स्थापन पैकेज एसजेवीएन तथा हिमाचल प्रदेश
सरकार के बीच हस्ताक्षरित क्रियान्वयन अनुबंध के
अनुसार यथासहमत पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास योजना के
अनुसार होगा, जिसमें अन्य सामान्य प्रावधानों के
अतिरिकत, आय सृजन हेतु मौलिक योजना तथा स्थानीय
युवकों के लिए तकनीकी शिक्षा योजना, नि: शुल्क
चिकित्सा जांच एवं चिकित्सा वाहन के जरिए परियोजना
प्रभावित ग्रामीणों को दवाईयां बांटना शामिल है ।
प्रत्येक परिवार को डेयरी फार्मिंग, मधुमक्खी
पालन, मुर्गीपालन, खादी इकाईयों और हस्तशिल्प
इत्यादि के लिए अधिकतम रू.30,000/- तक की वित्तीय
मदद दी जाएगी । पीएएफ एवं स्थानीय युवाओं हेतु
तकनीकी शिक्षा योजना (टीइएस) के तहत प्रत्येक वर्ष
35 छात्रों को रू.750/- राशि की प्रतिमाह बजीफे के
साथ आईटीआई कोर्सों के लिए प्रायोजित किया जाएगा ।
हिमाचल प्रदेश सरकार के निदेशक (तकनीकी शिक्षा) ने
पहले ही तकनीकी शिक्षा योजना के तहत् युवकों को
प्रायोजित करने के लिए विभिन्न आईटीआई में 30-40
सीटें आबंटित/चिन्हित कर दी गई हैं । रामपुर
जलविद्युत परियोजना में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन
पर रू.1255.00 मिलियन खर्च होंगे ।
विवरणात्मक पृष्ठों में उल्लिखित सर्चेबुल फील्ड
तथा अन्य डाटा की क्या परिभाषाएँ हैं ?
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