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19वीं आम वार्षिक बैठक के अवसर
पर अध्यक्षीय संबोधन
मान्यवर,
आज,
28
सितंबर,2007
को
संपन्न होने जा रही
19वीं आम
वार्षिक बैठक में मैं आप सभी को
हार्दिक रूप से
आमंत्रित करता हूँ।
वर्ष
2006-07
के
परीक्षित
वार्षिक लेखे सहित लेखा
परीक्षकों एवं
निदेशक मंडल की
रिपोर्ट आपके पास पहले से ही
उपलब्ध है तथा आपकी
अनुमति से मैं इसे पढ़ा हुआ मान लेता हूँ।
कंपनी की
विभिन्न
गतिविधियों तथा अन्य
क्षेत्रों में कंपनी के कार्य-निष्पादन की
विस्तृत
जानकारी
निदेशक मंडल की
रिपोर्ट में दी गई है।
मैं,
आपकी
अनुमति से कंपनी से
संबंधित कुछ
महत्वपूर्ण
मुद्दों पर
प्रकाश डालना
चाहूंगा।
वार्षिक कार्य-निष्पादन
विद्युत
उत्पादन और कंपनी की आय में
वृद्धि के मामले में यह वर्ष पिछले
वर्षों की तुलना में
श्रेष्ठ रहा है।
वर्ष
2006-07
के
समझौता
ज्ञापन के
अनुसार,
वर्ष के दौरान अधिक सिल्ट और
फ्लशिंग के कारण
16
दिन
उत्पादन बंद रहने के आधार पर सकल
विद्युत
उत्पादन का
लक्ष्य
6400
मिलियन यूनिट तय किया गया था।
सिल्ट की अधिक
मात्रा के कारण
विद्युत
संयंत्र
32
दिन बंद रहने के
बावजूद हमने
6014.48
मिलियन यूनिट
विद्युत का
उत्पादन किया।
पिछले वर्ष
विद्युत
उत्पादन
4104.42
मिलियन यूनिट हुआ था।
कर
उपरांत शुद्ध लाभ पिछले वर्ष के रु.498.21
करोड़ की तुलना में इस वर्ष रु.732.71
करोड़ रहा,
जबकि पिछले वर्ष के रु.159.43
करोड़ के
लाभांश की तुलना में इस वर्ष
अंतरिम
लाभांश सहित
प्रस्तावित
लाभांश रु.235
करोड़ है।
वर्ष
2004
से आय,
लाभ तथा पूंजी निवेश पर आय में
उत्तरोत्तर
वृद्धि विकास के
संकल्प की सूचक है।
भविष्य की
योजनाएँ
वर्तमान में,
भारत की
1,35,000
मेगावाट की कुल
स्थापित
विद्युत
उत्पादन
क्षमता में से जल
विद्युत
उत्पादन का
हिस्सा
33,775
मेगावाट है।
विद्युत
मंत्रालय की
"
सन्
2012
तक सभी के लिए बिजली
"
की अनूठी पहल के तहत
मौजूदा
क्षमता में
1,00,000
मेगावाट की
वृद्धि करने की
आवश्यकता है।
स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में मान्य
जलविद्युत ऊर्जा
सुरक्षा को
बढ़ाती है और
व्यस्ततम अवधि की मांग को भी पूरा करने हेतु एक आदर्श स्रोत है।
देश की आकलित
संभाव्य
जलविद्युत
क्षमता लगभग
1,50,000
मेगावाट है और
मौजूदा
संस्थापित
क्षमता आकलित
क्षमता के एक चौथाई से भी कम है।
मैं गर्व के साथ यह कह सकता हूँ कि हमारे आगे
असंख्य
कारोबारी मौके हैं और इनका फायदा उठाने का समय आ गया है।
इसके
मद्देनजर
उत्पादन
क्षमताओं
में
वृद्धि
करने के लिए हमने सरकार के साथ हाथ
मिलाया है और इस दिशा में पहली
परियोजना
रामपुर जल
विद्युत
परियोजना
(412
मेगावाट)
का
निर्माण करना है,
जिसका
निर्माण फरवरी,
2007
में शुरू हो चुका है।
परियोजना के
ज्यादातर घटकों के
अंतर्गत सिविल
कार्यों की
रफ्तार
शेड्यूल के
अनुसार है।
यह
परियोजना सिविल कार्य
अवार्ड किए जाने की तिथि से
11वीं
पंचवर्षीय योजना के
अंतर्गत
60
माह के अंदर सन्
2012
तक पूरी की जानी है।
इसके
अतिरिक्त,
वर्तमान में
उत्तराखण्ड सरकार के
विचाराधीन
उत्तराखण्ड
परियोजनाओं से
उत्पादन
क्षमता में
684
मेगावाट की और
वृद्धि होगी।
वर्तमान में,
इन
परियोजनाओं की
डीपीआर तैयार करने का कार्य
प्रगति पर है।
लूहरी
परियोजना का
सर्वेक्षण एवं
अन्वेषण कार्य पूरा हो चुका है और इसकी
डीपीआर तैयार करके
केन्द्रीय
विद्युत
प्राधिकरण को
प्रस्तुत की जा चुकी है।
इस
परियोजना से
770
मेगावाट
विद्युत
उत्पादन होने की आशा है।
परियोजना
आबंटित किए जाने
संबंधी
मंजूरी
हिमाचल
प्रदेश सरकार से
प्रतीक्षित है।
इस बीच,
यह ध्यान रखते हुए कि
हिमाचल
प्रदेश सरकार
इक्विटी में पूंजी निवेश
बढ़ाना चाहती है,
भविष्य में
हिमाचल
प्रदेश में लूहरी
परियोजना सहित अन्य
परियोजनाओं के
निर्माण के लिए हमारी कंपनी के
नियंत्रणाधीन एक
आनुषंगिक कंपनी बनाने सहित अन्य
प्रस्तावों पर भारत सरकार विचार कर रही है।
इसके
अतिरिक्त,
सिक्किम,
अरुणाचल
प्रदेश
जैसे
अन्य
राज्यों
सहित
नेपाल
एवं
भूटान
जैसे
पड़ोसी
देशों
में
भी
परियोजनाएं
लेने
के
प्रयास
किए
जा
रहे
हैं।
इस
आशय
के
प्रस्ताव
संबंधित
राज्य
सरकारों
एवं
देशों
को
भेजे
गए
हैं
और
ये
उनके
विचाराधीन
हैं।
उक्त
प्रयत्नों एवं
अवसरों के साथ मैं यह
नःसंदेह कह सकता हूँ कि इन
प्रयासों से न केवल कंपनी
समृद्ध होगी बल्कि देश और देश की जनता भी
समृद्धशाली होगी।
आभार
अंत में,
मैं
निदेशक मंडल के सभी
सदस्यों,
विद्युत
मंत्रालय,
हिमाचल
प्रदेश सरकार,
उत्तराखण्ड सरकार,
अन्य सभी
सरकारी एवं गैर-सरकारी
एजेन्सियों तथा
कर्मचारियों,
वित्तीय
संस्थानों,
ठेकेदारों और
आपूर्तिकर्त्ताओं से
प्राप्त
सहायता और सहयोग के लिए उनके प्रति
कृतज्ञता
व्यक्त करता हूँ।
सधन्यवाद।
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शिमला
दिनांकः
28
सितंबर,2007 |
आपका
(हेमंत
कुमार
शर्मा)
अध्यक्ष
एवं
प्रबंध
निदेशक |
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